बिना श्रद्धा और विश्वास के गंगा स्नान (Bina Shraddha Aur Vishwas Ke Ganga Snan)

एक समय की बात है जब माँ पार्वती और महादेव हरिद्वार में विहार कर रहे थे। तब माँ पार्वती ने देखा कि सहस्रों मनुष्य माँ गंगा में स्नान कर रहे है और “हर हर गंगे” का नाद करते हुए वहाँ से चले जा थे है किंतु प्रायः उनके पाप नष्ट नहीं हो रहे है, सभी पहले के तरह दुखी और पापपारायण है। जब महादेव ने माँ पार्वती को चिंतित देखा तो उन्होंने कहा – “है, देवी आप मुझे चिंतित दिखाई दे रहे है। क्या में आपकी इस चिंता का कारण जान सकता हूँ?” तब माँ पार्वती ने कहा –

“है नाथ..!! आप तो सर्वज्ञ है.. आप से भला क्या ही छिपा है। किंतु अगर आप मेरी चिंता का कारण मुझसे ही जानना चाहते है तो सुने…!!! में देख रही हूँ… हरिद्वार जैसे पावन स्थान पर कई मनुष्य माँ गंगा में स्नान कर के अपने किए हुए पापों से मुक्ति प्राप्त कर चले जाने चाहिए… किंतु में देख पा रही ही ऐसा नहीं हो पास रहा है.. प्रायः मनुष्य फिर से अपने दुखों से घिरा हुआ है और पाप पारायण है क्या अब देवी गंगा में इतना सामर्थ्य नहीं रहा कि वो इन पापी मनुष्यों के पापो को धो सके..!!!”

महादेव माँ पार्वती के मंशा जान कर मुस्कुराये और कहा – “ऐसा नहीं है देवी…!!! गंगा आज भी सभी मनुष्यों के पापो को धोने में सक्षम है..!! किंतु में देख रहा ही की इन लोगो ने माँ गंगा में स्नान ही नहीं किया है। अतः उन्हें कैसे अपने किए हुए पापों से मुक्ति मिल सकती है।

महादेव की बात सुनकर माँ पार्वती आश्चर्य में गिर गये और कहा-

पार्वती – “है प्रभु..!! में आपकी बात को समझी नहीं..!! क्या मैंने सही सुना कि इन मनुष्यों ने माँ गंगा में स्नान किया ही नहीं..!! ये कैसे संभव है..!! सभी लोग तो नहा नहा कर जा रहे है..!! अभी तक को उनके शरीर भी नहीं सूखे..!!!”

देवी पार्वती की बात सुन महादेव ने कहा – “है देवी..!! ये केवल जल में डुबकी लगा कर आ रहे है…!!! स्नान कर के नहीं..!! में आपको इसकी स्पष्टता कल करूँगा…!!!”

Bina Shraddha Aur Vishwas Ke Ganga Snan

अगले दिन बड़े ज़ोरो की बारिश हुई..!! नगर की गलियाँ कीचड़ से भर रही थी..!! वहीं एक चौड़े रास्ते पर एक गहरा गड्डा गिरा हुआ था और बारिश होने के कारण लपटीला कीचड़ उसके चारों ओर भरने लगा था। एक समय ऐसा आया कि कीचड़ की वजह से वो गड्डा दिखाई देना बंध हो गया..!! तब महादेव ने अपनी माया से एक दिन-विवश वृद्ध का रूप धारण किया और उसे चौड़े रास्ते से होते हुए उस गहरे गड्डे में जा गिरे, अधिक प्रयास करने पर भी वो उस गहरे गड्डे से बाहर निकल नहीं पाये।

महादेव जी ने पार्वती जी को यह कह कर अपने पास बिठा की – “देखो, तुम विवषता भरी करुण पुकार से रास्ते से जा रहे मनुष्यों को पुकारो और उन्हें कहो कि मेरे वृद्ध पति अनायास इस गहरे गड्डे में गिर पड़े है। आप में से कोई पुण्यात्मा उन्हें इस गड्डे से बाहर निकल के इनके प्राणों को रक्षा करे और साथ ही साथ उन्होंने माँ पार्वती को यह भी कहा कि अगर कोई मनुष्य मुझे इस गड्डे से बाहर निकल ने के लिये आये तो उन्हें यह कहना कि – “है भाई..!!! आप मेरे विवष पति की रक्षा करने के लिए सामने आए इस लिए में आपका धन्यवाद करती हूँ किन्तु यह ध्यान रहे अगर आप निष्पाप है तो ही आप मेरे पति की रक्षा करे अन्यथा अगर आपने ऐसा करने की कोशिश की तो आप स्वयं भस्म हो जाएँगे।”

माँ पार्वती अब “तथास्तु” कह कर गड्डे के पास विराजमान हो गए और आते जाते लोगो से अपनी करुण वाणी में रक्षा करने की दुहाई मंगाने लगे। गंगा में स्नान कर के लोगो के दल के दल बाहर आने लगे। कई लोग सुंदर स्त्री को अपने पति की रक्षा के लिए पुकारते देख उनके मन में पाप आया, कई लोग लज्जा से डरे तो कई लोगो को धर्म का भय हुआ, और कई क़ानून से डरे। कुछ लोगो ने तो पार्वती माँ को यह तक सुना दिया कि – “मरने दे इस बुड्ढे को, क्यों इसके लिए रो रही है..? आगे कई सज्जन पुरुष आये और माँ पार्वती की मदद करनी चाही किंतु वे भी माँ पार्वती के वचन सुन कर रुक गये। उनके मन में विचार आया कि भले ही हम गंगा में स्नान कर के आए किंतु उससे क्या हुआ हम पापी तो है ही, कभी इस बुद्ध की रक्षा करने के चक्कर में हम ख़ुद ही ना भस्म हो जाये। किसी का भी साहस नहीं हुआ। सेंकड़ो लोग आये, सेंकड़ो पूछा और फिर चले गये। इसी बीच संध्या हो चली। तब शिवजी ने माँ पार्वती से कहा – “देखा प्रिये..!!! आया कोई सच्चे हृदय से गंगा में स्नान कर के..!!!”

कुछ देर बाद एक जवान हाथ में लोटा लिए माँ गंगा में स्नान कर के आया और वृद्ध को गड्डे में गिरा हुआ देख उनकी मदद करने सामने आया, तभी माँ पार्वती ने उसे रोका और अपनी बात कही। “है पुत्र..!!! यदि तुम सर्वथा निष्पाप हो तभी मेरे पति को छूना अन्यथा तुम उसकी क्षण भस्म हो जाओगे।”

माँ पार्वती की बात सुन कर वो जवान दृढ़ निश्चय के साथ माँ पार्वती को बोला – “है माता..!! आपको मेरे निष्पाप होने पर क्यों संदेह हो रहा है..!! क्या आपने देखा नहीं में सभी माँ गंगा में स्नान कर के आया हूँ..!! में सभी आपके पति को बाहर निकाल कर उनकी रक्षा करता हूँ..!!” ऐसा कहने के साथ ही उसने हाथ बढ़ा कर उस वृद्ध को अपने कंधों पर उठा लिया और गड्डे से बाहर निकाला।”

युवक की निर्भयता से प्रसन्न हो के भगवान शिव और माता पार्वती ने उसे दर्शन दिये और कहा – “इतने लोगो में से केवल इस युवक ने सही मायनों में गंगा स्नान किया है।”

इसी दृष्टांत के अनुसार माँ गंगा में स्नान करने वाले सभी मनुष्यों जो बिना विश्वास और श्रद्धा से केवल दंभ के लिए स्नान करते है उन्हें माँ गंगा के पवित्र जल में स्नान करने का पुण्य फल प्राप्त नहीं होता। परंतु इसका ये अर्थ बिलकुल भी नहीं है की गंगा में स्नान करना व्यर्थ है। गंगा स्नान करने से आज भी आपको पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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